Q1.
मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति तभी हो पाती है, जब वह अपने तुच्छ भौतिक जीवन को नगण्य समझकर उत्साह-उमंग के साथ दूसरों की सेवा-सुश्रूषा तथा सत्कार करता है। यह कठोर सत्य है कि हम भौतिक रूप में इस संसार में सीमित अवधि तक ही रहेंगे। हमारी मृत्यु के बाद हमारे निकट संबंधी, मित्र, बंधु-बांधव जीवन भर हमारे लिए शोकाकुल और प्रेमाकुल भी नहीं रहेंगे। दुख मिश्रित इस निर्बल भावना पर विजय पाने के लिए तब हमारे अंतर्मन में एक विचार उठता है कि क्यों न हम अपने सत्कर्मों और सद्गुणों का प्रकाश फैलाकर सदा-سदा के लिए अमर हो जाएँ।
सेवक-प्रवृत्ति अपनाकर हम ऐसा अवश्य कर सकते हैं। अपने निःस्वार्थ व्यक्तित्व और परहित कर्मों के बल पर हम हमेशा के लिए मानवीय जीवन हेतु उत्प्रेरणा बन सकते हैं। अनुपम मनुष्य जीवन को सद्गति प्रदान करने के लिए यह विचार नया नहीं है। ऐसे विचार सज्जन मनुष्यों के अंतर्मन में सदा उठते रहे हैं तथा इन्हें अपनाकर वे दुनिया में अमर भी हो गए। इस धरा पर स्थायी रूप में नहीं रहने पर भी ऐसे परहितकारी कालांतर तक पूजे जाते रहेंगे। अमूल्य मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही है। यही सीखकर मनुष्य का जीवन आनंदमय और समृद्धिशाली हो सकता है।
यदि इस प्रकार मानव जीवन उन्नत होता है तो यह संपूर्ण संसार स्वर्गिक विस्तार ग्रहण कर लेगा। किसी भी मानव को आध्यात्मिकता का जो अंतिम ज्ञान मिलेगा, वह भी यही शिक्षा देगा कि धर्म-कर्म का उद्देश्य सत्कर्मों और सद्गुणों की ज्योति फैलाना ही है।
सेवक-प्रवृत्ति अपनाकर हम ऐसा अवश्य कर सकते हैं। अपने निःस्वार्थ व्यक्तित्व और परहित कर्मों के बल पर हम हमेशा के लिए मानवीय जीवन हेतु उत्प्रेरणा बन सकते हैं। अनुपम मनुष्य जीवन को सद्गति प्रदान करने के लिए यह विचार नया नहीं है। ऐसे विचार सज्जन मनुष्यों के अंतर्मन में सदा उठते रहे हैं तथा इन्हें अपनाकर वे दुनिया में अमर भी हो गए। इस धरा पर स्थायी रूप में नहीं रहने पर भी ऐसे परहितकारी कालांतर तक पूजे जाते रहेंगे। अमूल्य मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही है। यही सीखकर मनुष्य का जीवन आनंदमय और समृद्धिशाली हो सकता है।
यदि इस प्रकार मानव जीवन उन्नत होता है तो यह संपूर्ण संसार स्वर्गिक विस्तार ग्रहण कर लेगा। किसी भी मानव को आध्यात्मिकता का जो अंतिम ज्ञान मिलेगा, वह भी यही शिक्षा देगा कि धर्म-कर्म का उद्देश्य सत्कर्मों और सद्गुणों की ज्योति फैलाना ही है।
पाठांश में प्रयुक्त ‘आध्यात्मिकता’ शब्द किन उपसर्ग-प्रत्ययों से बना है ?
CTET Paper I - Jul 2019, Q96 (Official PYQ)
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