Q1.
दिशाएँ निमंत्रण मुझे दे रही हैं,
सफलता का यह द्वार मेरे लिए है ।।
न अवरोध कोई न बाधा कहीं है,
न संदेह कोई न व्यवधान कोई ।
अटल एक विश्वास मन में भरा है,
नहीं पथ-डगर आज अनजान कोई ।।
हृदय में कहीं कह रहा बात कोई,
धरा और गगन सिर्फ तेरे लिए है ।।
नहीं कुछ यहाँ जो मुझे रोक पाए,
न कोई यहाँ जो मुझे टोक पाए ।
अजानी हवा में बहे जा रहा हूँ
मुझे आज लगता कि मैं वह नहीं हूँ ।।
रही जगमगा इंद्रधनुषी दिशाएँ,
दिगंतर मंदिर रस अलौकिक पिए हैं ।।
सफलता का यह द्वार मेरे लिए है ।।
न अवरोध कोई न बाधा कहीं है,
न संदेह कोई न व्यवधान कोई ।
अटल एक विश्वास मन में भरा है,
नहीं पथ-डगर आज अनजान कोई ।।
हृदय में कहीं कह रहा बात कोई,
धरा और गगन सिर्फ तेरे लिए है ।।
नहीं कुछ यहाँ जो मुझे रोक पाए,
न कोई यहाँ जो मुझे टोक पाए ।
अजानी हवा में बहे जा रहा हूँ
मुझे आज लगता कि मैं वह नहीं हूँ ।।
रही जगमगा इंद्रधनुषी दिशाएँ,
दिगंतर मंदिर रस अलौकिक पिए हैं ।।
व्याकरण की दृष्टि से ‘इंद्रधनुषी’ शब्द है –
CTET Paper II - Jan 2021, Q103 (Official PYQ)
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